
गिरफ़्तारी के समय
- गिरफ़्तारी के कारण तुरंत बताए जाने चाहिए। अपराध ज़मानती हो तो यह भी बताया जाना चाहिए कि आप ज़मानत पर छूट सकते हैं (धारा 47)।
- गिरफ़्तारी ज्ञापन (arrest memo) बनता है, जिस पर परिवार के सदस्य या इलाके के किसी सम्मानित व्यक्ति के हस्ताक्षर होते हैं (धारा 36)।
- पुलिस को आपके बताए किसी रिश्तेदार या मित्र को गिरफ़्तारी और हिरासत के स्थान की सूचना देनी होती है (धारा 48)।
- सात वर्ष तक की सज़ा वाले अपराधों में अधिकतर पहले उपस्थिति का नोटिस दिया जाता है (धारा 35(3))।
हिरासत में
- पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलने का अधिकार है, यद्यपि पूरी पूछताछ के दौरान नहीं (धारा 38)।
- चिकित्सा अधिकारी द्वारा जाँच कराई जा सकती है (धारा 53)।
- गिरफ़्तारी के 24 घंटे के भीतर, यात्रा का समय छोड़कर, मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है (धारा 58, अनुच्छेद 22(2))।
ज़मानत के प्रकार
- ज़मानती अपराध में ज़मानत अधिकार के रूप में मिलती है (धारा 478)।
- गैर-ज़मानती अपराध में नियमित ज़मानत मजिस्ट्रेट (धारा 480) या सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय (धारा 483) से माँगी जाती है।
- गिरफ़्तारी की आशंका हो तो अग्रिम ज़मानत (धारा 482)।
- तय अवधि में आरोप पत्र दाख़िल न हो तो डिफ़ॉल्ट ज़मानत (धारा 187(3))। अवधि गिनने के लिए कैलकुलेटर देखें।
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अपने मामले के लिए किसी अधिवक्ता से परामर्श लें। सभी काग़ज़ात, जैसे FIR, नोटिस और आदेश, साथ रखें।
गगनदीप गोयल, अधिवक्ता के चैंबर द्वारा तैयार। अंतिम समीक्षा 14 अक्टूबर 2026।